चाँद बावड़ी-आभानेरी की अद्भुत कहानी

 

चाँद बावड़ीआभानेरी की अद्भुत कहानी

ज्यादातर लोगों को घूमनेफिरने के साथ किसी जगह से जुड़ा इतिहास जानने का भी बड़ा शौक होता है। अगर

आप भी उन लोगों में से एक हैं, तो मैं आपको राजस्थान की आभानेरी चांद बावड़ी के बारे में बताऊँगी जो जयपुर,

राजस्थान के आभानेरी गांव में स्थित हैं, 

 जिसका निर्माण 9वीं शताब्दी में सम्राट मिहिर भोज (जिन्हें कि चांद नाम से भी जाना जाता था) ने करवाया था, और

उन्हीं के नाम पर इस बावड़ी का नाम चांद बावड़ी पड़ा।



चाँद बावडी़ का इतिहास


चाँद बावड़ी भारत की सबसे प्राचीन बावडी़ हैं जो आज भी सजीव हैं इस बावडी़ का निर्माण राजा मिहिर भोज (जिन्हें राजा चाँद के नाम से भी जाना जाता हैं) 

ने 8वी से 9वी शताब्दी के बीच करवाया था 1200 से 1300 वर्ष प्राचीन यह संरचना ताजमहल, खजुराहो के मंदिर से

 भी प्राचीन हैं आभानेरी गांव को राजा चाँद ने बसाया था

 इसका प्राचीन नाम आभा नगरी था अर्थात चमकने वाला नगर 19 मीटर गहरी इस बावडी़ की दीवारो पर सोपान

 निर्मित है जो भूलभुलैया के रूप मे प्रतीत होते हैं

इन सीढियो पर एक तरफ से चढ़ते हैं कहा जाता हैं कि इन सीढियो के जिस तरफ से नीचे उतरते हैं उन सीढियो से

 वापस ऊपर लौटना असंभव है।इन 13 मंजिला दीवारों पर 3500 सीढिया बनायी गई हैं जो एक अद्भुत कला का उदाहरण है।

चाँद बावड़ी की गुप्त सुरंग



तीन मंजिला इस बावडी़ में नरेटिव कक्ष व गुप्त सुरंग बनी हुई है जिसकी लंबाई लगभग 17 किलोमीटर है जो पास 

ही स्थित गांव भांडारेज में निकलती है इस सुरंग के बारे मे ऐसा भी सुनने में आता है कि इसका उपयोग युद्ध के

 समय राजा या सैनिको द्वारा किया जाता था।कुछ समय पहले हुई खुदाई एवं जीर्णोद्धार में भी एक शिलालेख मिला

 है जिसमे राजा चाँद का उल्लेख मिलता है।


फिल्मों की शूटिंग



यहाँ कई प्रसिद्ध बॉलीवुड व हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। अंग्रेजी फ़िल्म ‘द फॉल’, ‘द डार्क नाईट

 राइज’ व हिंदी फिल्म ‘भूल भुलैया’ सहित अन्य कई फिल्मों की शूटिंग यहाँ पर हुई।

 चाँद बावड़ियों की सीढियो पर कई कलाकार भी थिरक चुके है।


चाँद बावड़ी देखने बड़ी संख्या में पर्यटक आते है लेकिन यह भरतीय पर्यटकों की तुलना म विदेशी पर्यटक अधिक

 संख्या में आते ह।

बावडी़ के समीप हर्षत माता का मंदिर भी स्थित है जहाँ नवरात्रि के अवसर पर पूजन भी किया जाता है।


हर्षत माता का मंदिर



हर्षत माता का अर्थ है “हर्ष देने वाली”। इस मंदिर को “हर्ष की दात्री” के नाम से भी जाना जाने लगा था। 

यह मंदिर चाँद बावडी़ के ठीक विपरीत दिशा में स्थित है तथा हिन्दु देवी हर्षत माता को समर्पित जो हर्ष और उल्लास की देवी है। इस विशाल मंदिर का निर्माण राजा चाँद द्वारा ही करवाया गया था।

वे दुर्गा को शक्ति के रूप में पूजते थे। इस मंदिर की दीवारो पर सभी हिन्दू देवी देवताओं के चित्र भी बनाये गए है।

यहाँ हर्षत माता देवी को सम्मान देते हुए हर वर्ष 3 दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता हैं जिसमें श्रद्धालुओं की 

भारी भीड़ उमड़ती है। यह मंदिर अपनी पत्थर की वास्तुकला के लिए जाना जाता है।

चाँद बावड़ी घूमने का सही समय


चाँद बावड़ी घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबरमार्च है क्योकि इस दौरान यह का मौसम अच्छा होता है। यहाँ 

गर्मियों में टेम्परेचर अधिक होने के कारण घूमने में मजा नही आता।


जाने का आसान रास्ता


यह जयपुर शहर से 95km दूर स्थित है। यह जाने के लिए आप दिल्ली या जयपुर से कार ले सकते हैं।यहाँ जाने के 

लिए आप हवाई यात्रा भी कर सकते है।यदि आप ट्रेन द्वारा यहाँ जान चाहते है तो यहाँ के लिए आप देश के सभी 

प्रमुख स्टेशन से ट्रेन ले सकते है।जयपुर म आभानेरी का निकटतम रेलहेड है तथा आप अपने वाहन से जा रहे है तो

 आपको बता दे कि आभानेरी NH-11 से कनेक्ट है।

 

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