लैंसडाउन, उत्तराखंड का खूबसूरत हिल स्टेशन


लैंसडाउन, उत्तराखंड राज्य का एक छोटा सा खूबसूरत हिल स्टेशन। यह उत्तराखंड के पौरी ज़िले में, समुंद्र तल से 1700  मी.की ऊंचाई पर स्तिथ है। इसका नाम अंग्रेज़ वाइसरॉय लार्ड लैंसडाउन के नाम पर रखा गया था।

बहुत प्रचलित हिल स्टेशन न होने कारण यह प्राकृतिक सौंदर्य की अनछुई धरोहर है।  जिसे भारतीय सेना की कमांड गढवाल राइफल्स ने संजोया हुआ है। यह एक कैंटोनमेंट टाउन है। जो बहुत ही स्वच्छ और सुंदर स्थान है।  

चारो ओर से ओक और देवदार के जंगल से घिरा यह हिल स्टेशन उन पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है जो शहर की भीड़ से दूर तो जाना चाहते है पर ज्यादा दूर ड्राइव नहीं करना चाहते।


क्यूंकि लैंसडाउन दिल्ली सिटी से मात्र 245 कि. मि. की दुरी पर है जिसे तय करने में 5 घन्टे 30 मिनट का समय लगता है। शनिवार और इतवार की छुट्टियां बिताने का सबसे अच्छा विकल्प है यह हिल स्टेशन।  


यहां आप प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के साथ -साथ और भी चीज़ो का मज़ा ले सकते है।  जैसे कैंपिंग, बोटिंग,

ट्रैकिंग, डाइनिंग, धार्मिक स्थलों के दर्शन, जंगल सफारी, स्नो व्यू पॉइंट ट्रेक, शौपिंग।


तो बस एक बैग पैक करें और हो जाइये लैंसडाउन की रोमांचक यात्रा के लिए तैयार। जहां आपको मिलेंगे —


भुल्लाताल में बोटिंग : 


यह एक मानव निर्मित झील है जिसे भारतीय सेना ने गरवाल राइफल्स के जवानो को समर्पित है जिनहोनें इसे दिन रात एक कर के बिना किसी सरकारी फण्ड और सहायता के बनाया है। इसमें आप बोटिंग का मज़ा ले सकते है। साथ ही फोटो क्लिक करने को भी तैयार रहिये, झील में तैरती हुई बत्तख़े और किनारो पर घूमते हुए ख़रगोश की।


यहां एक अम्यूजमेंट पार्क भी है। यकीन मानिये इस झील में बोटिंग के बाद आपको कोई न कोई कहानी, दोस्तों को बताने को मिल ही जाएगी।


यह ताल बोटींग के लिए पूरा सप्ताह सुबह के 9 से 12 और शाम के 3 से 6 बजे तक खुला होता है।


टिप और टॉप पॉइंट ट्रेकिंग :



इसे टिफिन पॉइंट भी कहा जाता है, टिप और टॉप पॉइंट पहाड़ी पर सेंट मैरी चर्च के पास एक लोकप्रिय स्थान है। यंहा तक आप ट्रेकिंग का मज़ा ले सकते है और ऊपर पहुंच कर शिवालिक के घने और हरे भरे जंगलो का और बर्फ से डकि हिमालय की चोटियों को देख सकते है। यहां आप फोटो लेने से खुद को रोक नहीं पाओगे।


यह स्थान प्रेमी जोड़ो के लिए लवर्स पॉइंट भी है। प्रकृति प्रेमियों और परिवार के साथ पिकनिक के लिए भी बहुत खुबशुरत जगह है।



 ताड़केश्वर धाम के दर्शन :


यह महादेव का एक प्राचीन मंदिर है जो टिप और टॉप पॉइंट से कुछ ही दुरी पर है। यहाँ के पेड़ो को देखकर आपको आश्चर्य होगा क्यूंकि सभी पेड़ शाखाओं में बटें हुए है जो भगवान महादेव के त्रिशूल का संकेत करते नज़र आते है।

पास ही में संतोषी माता का मंदिर भी है। जंहा आप एक अद्भुत शांति और घंटियों की धीमी गूंज को महसूस कर पाएंगे।


यहां दो चर्च भी है। सेंट मैरी चर्च और सेंट जॉन चर्च जिनमे आप माल रोड पर घूमते हुए भी जा सकते है। सेंट मैरी चर्च को एक म्यूजियम में बदल दिया गया है जो आज़ादी से पहले के दृश्यों को दर्शाता है।


स्नो व्यू पॉइंट ट्रेकिंग :


ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए ये बहुत खूबसूरत और रोमांचक जगह है। यहां से स्नो व्यू पॉइंट और हवाघर तक की ट्रेकिंग की जाती है। ठंडी हवा, खुबसूरत नज़ारे और रोमांचित कर देने वाले हिमालय के दृश्य आपको मंत्रमुग्द कर देते है। आपको कैमरा साथ ले जाना नहीं भूलना है। क्यूंकि यहां आपको आपकी ज़िंदगी के बहुत नायब लम्हे फोटोज में क़ैद करने को मिलेंगे।

आप मुताबिक आसान से मुश्किल ट्रेक चुन सकते है जो कुछ घंटो से दो – तीन दिनों तक हो सकते है।


कैंपिंग और बोन फायर :


प्रकृति की गोद में घने पेड़ों की छाँव कैंपिंग के लिए सबसे उपयुक्त है। यहाँ आप एक से दो रात कैंपिंग कर बोनफायर का मज़ा सकते है। आकाश के नीचे और बोनफायर के चारो ओर बैठ कर रात के खाने का मज़ा ही कुछ अलग होगा।

यह अनुभव होटल के बंद कमरों में रहने से बहुत अधिक रोमांचित होता है। क्यूंकि आप खुद को प्रकृति के और नजदीक महसूस करते हैं। आकाश में तारों के झुण्ड साफ़ दिखाई देते है जो शहर के प्रदूषण में कंही खो गए है। यहां आप मार्च से नवंबर तक कैंपिंग कर सकते है।


कालागढ़ टाइगर रिज़र्व :


कालागढ़ टाइगर रिज़र्व जिम कॉर्बेट का ही उत्तरी हिस्सा है। जहां आप जंगल सफारी का आनंद ले सकते है। यह कम से कम 300 स्कूवेयर कि. मि. में फैला हुआ है। यहाँ टाइगर्स सांखियाँ भी काफी है। तो आपको इनके दर्शन भी जरूर होंगे।

न सिर्फ टाइगर यहाँ आपको बार्किंग हिरण , सांभर , हॉग हिरण आदि वन्य जानवर देखने देखने को मिलेंगे। इस जंगल सफारी को आप अपनी यात्रा में जरूर शामिल करना।

यहां आपको असली जंगल और जंगली जानवरो को देखने का मौका मिलेगा जो अपने आप में एक बहुत अद्भुत अनुभव है।


गढ़वाली खाना :


अगर आप घर से इतनी दूर पहाडो में आएं और यहाँ का खाना नहीं खाया तो आपकी यात्रा अधूरी रह जाएगी। हर जगह अपने विशेष तरह के खाने पीने के लिए प्रसीद्ध होती है। गढ़वाल भी अपना एक अलग स्वाद रखता है। जो आपको यहां की लोकल रेस्टोरंट में खाने को मिलेगा।

कुलथ की दाल औरआलू के गुटके, काफूली, फाणु, गुलगुला, अरसा जैसी स्वादिस्ट खाने को खा सकते है। जो आपके अपने खाने के स्वाद से अलग है। यकीन मानिये पहाड़ो में वंही का खाना और पानी आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह मैं अपने अनुभव से कह रही हूँ।

शहर से बाहर अगर आएं है तो यहाँ की शुद्ध हवा के साथ खाना पीना भी तो शुद्ध खाइए।


गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल वॉर मेमोरियल :


इसकी स्थापना लार्ड रालिंगसन, जो उस समय चीफ कमांडर थे, के द्वारा 11 नवम्बर 1923 को गढ़वाल राइफल्स के जवानो को श्रद्धांजलि देने के लिए की गई। यह पर्यटकों आकर्षण का केंद्र है जो पुरे भारत से इसमें परेड देखने आते है। यहां वन बहुत घना और हरियाली से परिपूर्ण है।

यहां लम्बी सैर और पिकनींक का मज़ा लिया जा सकता है। यहां से पश्चिमी हिमालय की ढकी चोटियों को देखा जा सकता है इसलिए फोटो शूट करने के लिए यह स्थान बिलकुल उचित है


इसके साथ ही लैंसडाउन में आप बर्ड वाचिंग भी कर सकते है क्यूंकि यहां प्रवासी पक्षी भी आते है।  प्रकृति प्रेमियों के लिए नेचर वाक और फोटो शूट के लिए भी यह हिल स्टेशन बहुत शांत और रमणीय है।   


लैन्सडाउन का मौसम और घूमने का उचित समय :


वर्षा की ऋतू के अलावा आप पुरे साल यहां घूमने आ सकते है। जनवरी से जून और अक्टूबर से दिसंबर तक यहाँ मौसम घूमने के लिए अनुकूल और सुहावना रहता है।

कैसे पहुँचे लैन्सडाउन :

ट्रैन से : सबसे नज़दीक रेलवे स्टेशन कोटद्वार है। जो भारत के सभी स्थानों से अच्छी तरह जुड़ा है। यहां से टैक्सी और बस की सुविधा उप्लब्ध है।

ऐरोप्लेन से : सबसे नज़दीक एयरपोर्ट देहरादून में जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। जो भारत के सभी बड़े शहरों से जुड़ा है। यहां से टैक्सी और बस की सुविधा उप्लब्ध है।

रोड से : लैंसडाउन सभी बड़े शहरो से रोड से अच्छी तरह जुड़ा है। और रोड से यात्रा सबसे अधिक क्यूंकि इस से आप कम समय में पहुंच सकते है। ISBT कश्मिरी गेट से कोटवार तक बस सेवा उपलब्ध है। और कोटवार से लैंसडाउन तक बस और टैक्सी सेवा मिलती हैं।

दिल्ली >गाजियाबाद >मेरठ > कोटद्वार > लैंसडाउन


आपकी यात्रा यादगार होगी।

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